साहिबगंज में जिप सदस्य व डीडीसी फिर आमने-सामने

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साहिबगंज: जिला परिषद बोर्ड की बैठक हंगामे के भेंट चढ़ गई। पिछले विभिन्न बैठक में लिए गए प्रस्तावों पर क्रियान्वयन नहीं होने के विरोध में अध्यक्ष रेणुका मुर्मू व उपाध्यक्ष सुनील यादव की अगुवाई जिला परिषद सदस्यों ने शुक्रवार को जिला परिषद कार्यालय के सभागार में होने वाली जिला परिषद बोर्ड की बैठक का बहिष्कार कर दिया। बैठक के लिए डीडीसी नैंसी सहाय के अलावे अन्य विभागों के पदाधिकारी भी सभागार में पहुंच गए थे, लेकिन जिला परिषद सदस्यों ने एकजुट होकर बैठक का बीच में ही बहिष्कार कर सभागार से निकल गए। अध्यक्ष रेणुका मुर्मू व उपाध्यक्ष सुनील यादव सहित अन्य जिप सदस्यों का आरोप था कि बीते 2 फरवरी 2016 से 18 अगस्त 2017 के बीच जिला परिषद की विभिन्न बैठकों में लिए गए विकास संबंधी 36 प्रस्तावों में से एक भी प्रस्ताव का क्रियान्वयन नही किया गया, ऐसे में बैठक की खानापूर्ति करने से क्या फायदा। निर्धारित समय पर बैठक शुरू होते ही अध्यक्ष व उपाध्यक्ष ने पिछले बैठक में लिए गए प्रस्ताव पर हुई कार्यवाही के संबंध में डीडीसी से जानना चाहा। लेकिन कोई ठोस जबाव नहीं मिल पाने से नाराज जिप सदस्यों ने बीच में सभागार से निकलकर बैठक का बहिष्कार कर दिया। मौके पर जिप सदस्य दिनेश तूरी, जॉन मुर्मू, सुनीता टुडू, स्टेलिना बेसरा, वरण किस्कू, मुफक्कर हुसैन, सुष्मिता देवी, अधिर मंडल आदि उपस्थित थे।

क्या कहते हैं अध्यक्ष व उपाध्यक्ष:

जिला परिषद अध्यक्ष रेणुका मुर्मू व उपाध्यक्ष सुनील यादव ने कहा कि जिला परिषद का एक शिष्टमंडल उपायुक्त से मिलकर एक ज्ञापन सौंपकर पिछले बैठक में लिए गए प्रस्तावों को क्रियान्वयन कराने की मांग करेगी। 15 दिनों में कोई सार्थक पहल नही होने पर जिला परिषद कार्यालय में अनिश्चितकालीन तालाबंदी कर दी जाएगी। कहा कि पिछली बैठकों में लिए गए 36 में से एक भी प्रस्ताव को अमलीजामा नही पहनाया जाना दुखद है और सरकार के पंचायती राज की मंशा चकनाचूर हो गया है।

क्या कहती हैं डीडीसी:

डीडीसी नैंसी सहाय ने कहा कि बैठक का बहिष्कार औचित्यहीन है। जिला परिषद को विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए चार करोड़ रुपये प्राप्त हुई है। उसने सभी सदस्यों से उक्त राशि से अपने-अपने क्षेत्र में क्रियान्वयन के लिए योजनाओं की सूची मांगी गई थी, ताकि सरकारी गाइड लाइन के अनुसार सभी सदस्यों को योजना के लिए राशि बराबर-बराबर बांटी जा सके। सदस्यों से प्राप्त हुई सूची पर ही प्रशासनिक स्वीकृति ली जानी थी, लेकिन सदस्य बीच में बैठक से उठकर चले गए। कहा कि यदि कार्यालय में तालाबंदी की जाती है, तो धारा 353 के तहत सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।